कमल ने किया कमाल, पर रह गया मलाल!
बीजेपी ने कर्नाटक जीत लिया।
कमल ख़ूब खिला।
अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने कमाल कर दिया।
पर थोड़ा मलाल तो रह गया।
काश आँकड़ा कुछ आगे बढ़ गया होता।
काश कमल ११२ को छू लेता, ख़ुशी दुगनी हो जाती।
पर क्या अफ़सोस करना!ये हमारे देश की राजनीति है।
यहाँ नम्बर गेम चलता है।
दो सीटें जीतकर जो पार्टी अपनी सरकार बना सकती है उसके पास अब तो १०८ है।
साम, दान, दण्ड और भेद।
राजनीति के हथियार है।
सब अपनाए जायेंगे।दूसरी ओर JDS सरकार बनाने को बेक़रार है।
कोंग्रेस समर्थन देने को बेताब।
अब देखे इस जोड़ तोड़ में कौन बाज़ी मार जाता है।
किसकी सरकार बन पाती है। क्या कमल का जादू चल सकेगा?हमारे युवराज ने मेहनत तो बहुत की पर सरकार को फिर से ला नही पाए।
ताबड तोड़ रैलियाँ, तपती धूप में जन सभाएँ।
कुछ काम नही आया।
दूसरी ओर कमल लिए बी॰जे॰पी॰ के चाणक्य की नीति सही दिशा में चली।
आधा पन्ना योजना काम कर गई।
शायद कोंग्रेस मुक्त सरकार बन भी जाए।
अगर ऐसा हो जाता है तो मौजूदा सरकार के लिए २०१९ की राह सुगम हो जाएगी।
पर थोड़ा मलाल तो रह गया।
काश आँकड़ा कुछ आगे बढ़ गया होता।
काश कमल ११२ को छू लेता, ख़ुशी दुगनी हो जाती।
पर क्या अफ़सोस करना!ये हमारे देश की राजनीति है।
यहाँ नम्बर गेम चलता है।
दो सीटें जीतकर जो पार्टी अपनी सरकार बना सकती है उसके पास अब तो १०८ है।
साम, दान, दण्ड और भेद।
राजनीति के हथियार है।
सब अपनाए जायेंगे।दूसरी ओर JDS सरकार बनाने को बेक़रार है।
कोंग्रेस समर्थन देने को बेताब।
अब देखे इस जोड़ तोड़ में कौन बाज़ी मार जाता है।
किसकी सरकार बन पाती है। क्या कमल का जादू चल सकेगा?हमारे युवराज ने मेहनत तो बहुत की पर सरकार को फिर से ला नही पाए।
ताबड तोड़ रैलियाँ, तपती धूप में जन सभाएँ।
कुछ काम नही आया।
दूसरी ओर कमल लिए बी॰जे॰पी॰ के चाणक्य की नीति सही दिशा में चली।
आधा पन्ना योजना काम कर गई।
शायद कोंग्रेस मुक्त सरकार बन भी जाए।
अगर ऐसा हो जाता है तो मौजूदा सरकार के लिए २०१९ की राह सुगम हो जाएगी।

